क्या रट्टा मारना भविष्य को नष्ट कर रहा है?
मैं अक्सर सोचता हूँ कि हमारी शिक्षा प्रणाली में कुछ ऐसा है जो हमारे बच्चों के भविष्य को सीमित कर रहा है। जब मैं देखता हूँ कि बच्चे घंटों तक किताबों में सिर झुकाए रट्टा मार रहे हैं, तो मेरा मन उदास हो जाता है। क्या यही वह तरीका है जिससे हम उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं? क्या rote learning सचमुच उनके भविष्य को नष्ट कर रही है? मेरा मानना है कि हाँ, यह एक गंभीर समस्या है, और हमें इस पर तुरंत ध्यान देना होगा।
जब मैंने The Base Neo School, Haldwani, Uttarakhand में बच्चों के लिए एक नया दृष्टिकोण शुरू किया, तो मेरा उद्देश्य यही था कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहे। हमने JEP को अपनाया, जिसमें हर विषय को entrepreneurship के नजरिए से पढ़ाया जाता है। मेरा विश्वास है कि बच्चे तभी सही मायने में सीखते हैं, जब वे चीजों को समझते हैं, न कि केवल याद करते हैं।
रट्टा मारने की सीमाएँ
रट्टा मारना, यानी बिना समझे चीजों को याद करना, बच्चों के दिमाग को एक मशीन बना देता है। मैंने देखा है कि ऐसे बच्चे परीक्षा में तो अच्छे अंक ला लेते हैं, लेकिन जब उनसे कोई नया सवाल पूछा जाता है या जीवन की वास्तविक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो वे हतप्रभ हो जाते हैं। Creativity और critical thinking जैसे गुण, जो भविष्य में सफलता के लिए सबसे जरूरी हैं, रट्टा मारने से पूरी तरह गायब हो जाते हैं।
मैं एक उदाहरण देना चाहूँगा। कुछ समय पहले एक बच्चे ने मुझसे पूछा कि वह जो टेबल याद कर रहा है, वह उसकी जिंदगी में कैसे काम आएगा। मैंने उसे समझाया कि अगर वह इसे केवल रट लेगा, तो शायद कभी काम न आए। लेकिन अगर वह इसे business calculations या रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करना सीख ले, तो यह उसके लिए एक ताकत बन जाएगा। हमारे JEP approach में हम यही करते हैं—हर विषय को व्यावहारिक बनाना।
रट्टा मारने से भविष्य पर असर
जब बच्चे केवल रट्टा मारते हैं, तो उनका brain development प्रभावित होता है। मेरा मानना है कि 90% brain development 5 साल की उम्र तक हो जाता है। अगर इस उम्र में हम उन्हें केवल याद करने के लिए मजबूर करेंगे, तो उनकी problem-solving skills और innovation की क्षमता कैसे विकसित होगी? मैंने देखा है कि ऐसे बच्चे बड़े होने पर नई चुनौतियों से डरते हैं, क्योंकि उनका दिमाग केवल पहले से तय जवाबों को दोहराने का आदी हो जाता है।
हमारे देश में entrepreneurial mindset की बहुत कमी है। मैं अक्सर सोचता हूँ कि अगर बच्चों को शुरू से ही leadership और risk-taking सिखाया जाए, तो वे भविष्य में न केवल नौकरी तलाशने वाले, बल्कि नौकरी देने वाले बन सकते हैं। लेकिन रट्टा मारने की प्रथा इस सोच को मार देती है।
क्या है समाधान?
मेरा मानना है कि शिक्षा को बदलने की जरूरत है। हमें बच्चों को रटने के बजाय समझने, सवाल पूछने और नई चीजें खोजने के लिए प्रेरित करना होगा। The Base Neo School में हमारा मिशन यही है। हमारी tagline है—“Entrepreneurship Starts at 3, Not at 30!” हम चाहते हैं कि बच्चे छोटी उम्र से ही एक confident leader बनना शुरू कर दें।
इसके लिए हमने कुछ कदम उठाए हैं, जो माता-पिता और शिक्षकों को भी प्रेरित कर सकते हैं:
- बच्चों को हर दिन एक नया सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे उनकी curiosity बढ़ेगी।
- पढ़ाई को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ें। जैसे, गणित को budget planning से जोड़कर सिखाएं।
- उन्हें असफल होने का मौका दें। हार से सीखना, जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
- Group activities और projects पर ध्यान दें, ताकि वे teamwork सीखें।
माता-पिता की भूमिका
मैं सभी माता-पिता से कहना चाहूँगा कि आप अपने बच्चों को केवल अंकों के पीछे न दौड़ने दें। उनके skills और passion पर ध्यान दें। मैंने देखा है कि कई बार माता-पिता बच्चों पर रट्टा मारने का दबाव डालते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि यही सफलता का रास्ता है। लेकिन मैं आपसे पूछना चाहता हूँ—क्या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा केवल एक डिग्री होल्डर बने, या एक ऐसा इंसान जो जीवन में कुछ बड़ा करे?
मेरा विश्वास है कि हर बच्चे में एक entrepreneur छुपा होता है। हमें बस उसे बाहर निकालने का सही तरीका ढूँढना है।
हमारा सपना
St. Lawrence Sr. Sec. School की legacy को आगे बढ़ाते हुए, मैंने The Base Neo School में यह सपना देखा है कि हमारे बच्चे Pre-Primary से ही entrepreneurial mindset के साथ बड़े हों। हम चाहते हैं कि Class VI तक पहुँचते-पहुँचते वे इतने सक्षम हो जाएँ कि किसी भी समस्या का हल निकाल सकें। मेरा मानना है कि अगर हम रट्टा मारने की इस प्रथा को खत्म कर दें, तो हमारा भविष्य बहुत उज्ज्वल हो सकता है।
मैं आप सभी से कहना चाहूँगा कि शिक्षा को एक बोझ न बनने दें। इसे एक ऐसा सफर बनाएं, जिसमें बच्चे हर दिन कुछ नया सीखें, कुछ नया समझें। हम सब मिलकर अपने बच्चों के लिए एक ऐसा भविष्य बना सकते हैं, जहाँ वे केवल किताबी कीड़े न हों, बल्कि सच्चे innovators और leaders बनें।
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